मिशन D3 (देेजा, दारु, डीजे) क्या है? जानिए ,इस आर्टिकल में......
मिशन D3 एक जागरूकता अभियान है,D3 का अर्थ है, देजा (दहेज), दारू और डीजे । इस मिशन के संस्थापक सामाजिक कार्यकर्ता नितेश अलावा जी है। इस अभियान की शुरुआत मध्यप्रदेश राज्य के अलीराजपुर जिले से की गई है, इस अभियान के माध्यम से गांव, पंचायत, जनपद और जिला स्तर पर सभा करके लोगो को दहेज, दारू, डीजे आदि से समाज में होने वाले विपरित (नकारात्मक) प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान में आम नागरिक से लेकर , सामाजिक कार्यकर्ता, सरपंच, पटेल, तड़वी, नेता , अधिकारी, कर्मचारी इत्यादि सभी का सहयोग मिल रहा है। मिशन D3 के माध्यम से विशेष रूप से आदिवासी समाज में फैली हुई कुरीतियों को नियंत्रित तथा उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
मिशन D3 की शुरुआत क्यों की गई?
आदीवासी समाज में अनेक प्रकार की कुरीतिया फैली हुई है, जिसकी वजह से आदीवासी समाज विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर होता नजर आ रहा है, जिसका प्रभाव उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। इनकुरितियो पर लगाम लगाना अति आवश्यक है। चलिए इनके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं....
1. आदीवासी समाज में खासकर अलिराजपुर और झाबुआ क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में दहेज लिया एवम् दिया जाता है, अधिक आमदनी न होने की वजह से उन्हें कर्जा लेना पड़ता है। बैंक से लोन न मिल पाने की वजह से उन्हें साहूकार से ऊंचे ब्याज दर से कर्जा लेना पड़ता है। कर्जा चुकाने के लिए उन्हें गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि जगह पर मजदूरी करने जाना पड़ता है। जिसका प्रभाव बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ता है, क्योंकि जब वह मजदूरी करने जाते हैं तो उनमें से किसी को अपने बच्चो को भी साथ ले जाना पड़ता है, घर पर कोई देखभाल करने वाला न होने की वजह से। जिसकी वजह से वह शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं।
2. अगर कोई सामाजिक कार्यक्रम या शादी, इन्द जेसे कार्यक्रम होते हैं, तो इन कार्यक्रम में अत्यधिक मात्रा में दारू का सेवन किया जाता हैं। ये एक परंपरा जैसी बन गई हैं, अगर किसी को दारू नहीं पिलाई जाती तो वह नाराज हो जाता हैं। अगर कोई दारू नही पिलाना चाहता है लेकिन उसको फिर मजबूरी में पैसे न होते हुए भी पिलाना पड़ता है।
दारू पीने की लत अभी युवाओं में काफ़ी देखने को मिलती हैं,युवा इस लत में बुरी तरह से फंसे हुए हैं, किसी का जन्मदिन हो या फिर कोई पार्टी इनमें काफी मात्रा में दारू का सेवन किया जाता हैं। जिसकी वजह से आदिवासी समाज पिछड़ता नजर आ रहा है। बच्चे भी इसका शिकार हो रहे, उनके हाथ में कलम की जगह पर सिगरेट और शराब की बोतल देखने को मिल रही है,जो की एक अत्यंत चिंता का विषय है।
3. आदिवासी समाज में खासकर अलिराजपुर और झाबुआ जिले में शादियां होती है,तो इन जगहों में डीजे भी काफी देखने को मिलते हैं। एक डीजे की जगह पर पर आठ- नौ डीजे देखने को मिलते हैं। इन क्षेत्रों में यह एक परंपरा जैसी बन गई हैं, अगर कोई डीजे लाता है, तो उसके वहा भी ले जाना पड़ता है। अगर कोई डीजे नही ले जायेंगे तो उनसे नाराज हो जाते हैं, और बात भी नही करते हैं। डीजे ले जाते है तो दारु, वाहन, फटाके आदि की भी व्यवस्था करनी पड़ती है, जिसकी वजह से काफी खर्चा हो जाता हैं।
इसके अलावा धर्मांतरण की समस्या भी काफी देखने को मिलती है लोगो को बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन करा दिया जाता हैं।, तथा अन्य कुरीतिया भी देखने को मिलती हैं। जिस पर नियंत्रण होना अति आवश्यक है।
आदिवासी समाज में फैली कुरीतियों को नियंत्रित करने तथा आदिवासी समाज को जागरुक करके, उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा सही दिशा दिखाने के उद्देश्य से मिशन D3 अभियान की शुरुआत की गई हैं।
मिशन D3 के नियम अपनाने के लाभ: -
मिशन D3 के नियम सभी जिम्मेदार नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, नेता, कर्मचारी, आधकारी
, सरपंच ,पटेल, तड़वी आदि लोगो से आपस में विचार विमर्श करके, आम लोगों से चर्चा करके, समस्या को ध्यान में रखकर समाज हित में बनाए गए हैं।
वैसे तो मिशन D3 के नियम अपनाने के अनेकों लाभ है, जिनमें से कुछ लाभ निम्नलिखित हैं :-
(1) दारु पर नियंत्रण से काफ़ी पैसे बच जाएंगे और उन पैसे को अच्छी शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य पर लगाया जा सकता है।
(2) डीजे पर नियंत्रण होने से भी काफी पैसे बर्बाद होने से बच जाएंगे और कर्जा नहीं करना पड़ेगा। ओर हम अच्छे से , खुशी से अपने बेटे, भाई, बेटी, बहन की शादी करा पाएंगे।
(3) दहेज पर नियंत्रण होने से बेटी, बहन अपना जीवन खुशी से जी पाएगी, और सभी अच्छे से रहेंगे, उन्हें कर्जा चुकाने के लिए मजबूरी में मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।
मिशन D3 अभियान के माध्यम से आदिवासी समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में काफी मदद मिल रही हैं, ओर इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। कई सारे लोग इस अभियान में जुड़कर इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। यह अभियान अब अलीराजपुर और झाबुआ जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य क्षेत्र के लोग भी इस अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, ओर इस अभियान से जुड़ रहे हैं। ओर अपने समाज को आगे बढ़ाने एवम् जागरूकता लाने में योगदान दे रहे हैं।
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