भारत में आरक्षण का उद्देश्य यह है कि समाज के ऐसे लोग, जो लंबे समय तक पिछड़े रहे हैं, उन्हें शिक्षा और नौकरियों में बराबरी का मौका मिले। लेकिन समय के साथ यह देखा गया कि पिछड़े वर्गों में भी कुछ परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से मज़बूत हो गए हैं। अगर ये भी आरक्षण का लाभ लेते रहें तो वाकई ज़रूरतमंद लोगों तक इसका फायदा नहीं पहुँचेगा। इसी सोच से Creamy Layer की अवधारणा आई।
Creamy Layer क्या है?
सरल शब्दों में, Creamy Layer का मतलब है – सक्षम और मज़बूत परिवारों को आरक्षण से बाहर रखना।
यानी, आरक्षण केवल उन तक पहुँचे जिन्हें वास्तव में मदद की ज़रूरत है।
इसे ऐसे समझिए (उदाहरणों के साथ):
1. आर्थिक उदाहरण:
मान लीजिए दो परिवार हैं –
(A)पहला परिवार: किसान है, सालाना आमदनी सिर्फ़ 2 लाख रुपये है।
(B)दूसरा परिवार: सरकारी अफ़सर है, सालाना आमदनी 10 लाख रुपये है।
अगर दोनों को आरक्षण मिलेगा, तो वाकई मदद की ज़रूरत किसे है? ज़ाहिर है, पहले परिवार को।
इसलिए दूसरे परिवार को Creamy Layer मानकर बाहर किया जाएगा।
2. नौकरी का उदाहरण:
एक बच्चा ऐसे परिवार से है, जहाँ माता-पिता उच्च पदों (जैसे बड़े अफ़सर, कर्नल, या कंपनी के टॉप अधिकारी) पर काम करते हैं।
दूसरा बच्चा उस परिवार से है, जहाँ माता-पिता छोटे स्तर की नौकरी या मेहनत-मज़दूरी करते हैं।
साफ है कि पहले बच्चे को पहले से ही अच्छे संसाधन मिल रहे हैं, जबकि दूसरे को अतिरिक्त मदद की ज़रूरत है।
इसलिए Creamy Layer नियम के तहत पहले बच्चे को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
नियम कैसे तय होते हैं?
1.सरकार ने आय की सीमा तय की है।
2.अगर किसी परिवार की वार्षिक आय एक निश्चित सीमा (जैसे 8 लाख रुपये) से ज़्यादा है, तो वह Creamy Layer में आएगा। इसके अलावा समय समय पर ज़रुरी बदलाव किया जाता हैं।
आय के अलावा, माता-पिता की नौकरी और सामाजिक स्थिति भी देखी जाती है।
Creamy Layer क्यों ज़रूरी है?
1. आरक्षण का सही उपयोग हो – यह सुनिश्चित करने के लिए कि सहायता असली ज़रूरतमंदों तक पहुँचे।
2. समान अवसर मिले – जो परिवार पहले से मज़बूत हैं, वे अवसरों पर कब्ज़ा न कर लें।
3. सामाजिक संतुलन – समाज में आगे बढ़े और पीछे छूटे परिवारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए।
निष्कर्ष :-
Creamy Layer एक तरह का फ़िल्टर है। यह कहता है कि – “अगर आप पहले से ही सक्षम हैं, तो आरक्षण की ज़रूरत दूसरों को दी जाए।” इस तरह, आरक्षण का उद्देश्य सिर्फ़ ज़रूरतमंदों की मदद करना है, ना कि उन लोगों को लाभ देना जो पहले से ही मज़बूत स्थिति में हैं।
अभी के लिए इस आर्टिकल में इतना ही, आगे फिर चर्चा करेंगे किसी और टॉपिक पर । इस आर्टिकल को यहां तक पड़ने के लिए आपका धन्यवाद। मिलते हैं फिर अगले आर्टिकल में।
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